Sunday, January 15, 2017

Badi bewafa ho jati hai

बड़ी बेवफ़ा हो जाती है ग़ालिब ये घड़ी भी सर्दियों में;
पाँच मिनट और सोने की सोचो तो, तीस मिनट आगे बढ़ जाती है

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